12 अगस्त 2023, अधिकमास श्रावण कृष्ण 11
परमा एकादशी व्रत

अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को परमा एकादशी कहते हैं। वैसे तो प्रत्येक वर्ष 24 एकादशियां होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है, तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। अधिकमास में 2 एकादशियां होती हैं, जो पद्मिनी एकादशी (शुक्ल पक्ष) और परमा एकादशी (कृष्ण पक्ष) के नाम से जानी जाती हैं।



परमा एकादशी व्रत विधि -
  • एकादशी व्रत करने वाले व्यक्ति को एकाद्शी के दिन प्रात: उठना चाहिए ।
  • प्रात:काल की सभी क्रियाओं से मुक्त होने के बाद मिट्टी, तिल, कुश और आंवले के लेप के साथ स्नान करना चाहिए । इस स्नान को किसी पवित्र नदी, तीर्थ या सरोवर अथवा तालाब पर करना चाहिए ।
  • स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करने चाहिए ।
  • व्रत करने वाले को घी का दीपक जलाकर फल, फूल, तिल, चंदन एवं धूप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए ।
  • इस व्रत में विष्णु सहस्रनाम एवं भगवान विष्णु के अन्य स्तोत्रों का पाठ करने का बड़ा महत्व होता है ।
  • व्रत करने वाले को जब भी समय मिले इनका पाठ अवश्य करना चाहिए ।
  • सात्विक भोजन करना चाहिए, भोजन में मसूर, चना, शहद, शाक और मांगा हुआ भोजन नहीं करना चाहिए ।
परमा एकादशी व्रत महत्व -
जो मनुष्य परम एकादशी का व्रत करता है, उसे सभी तीर्थों व यज्ञों आदि का फल प्राप्त होता है। जिस प्रकार संसार में दो पैरों वालों में ब्राह्मण, चार पैरों वालों में गौ, देवताओं में देवेंद्र श्रेष्ठ हैं, उसी प्रकार मासों में अधिक (लौंद) मास उत्तम है। इस माह में पंचरात्रि अत्यंत पुण्य देने वाली होती है। इस माह में पद्मिनी और परमा एकादशी भी श्रेष्ठ है। इनके व्रत से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं, अतः दरिद्र मनुष्य को एक व्रत जरूर करना चाहिए। जो मनुष्य अधिक मास में स्नान तथा एकादशी व्रत नहीं करते, उन्हें आत्महत्या करने का पाप लगता है। यह मनुष्य योनि बड़े पुण्यों से मिलती है, इसलिए मनुष्य को एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए।