| 01 जुलाई 2023, आषाढ़ शुक्ल 13 विजया पार्वती व्रत |
| विजया पार्वती व्रत |
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आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए विजया पार्वती व्रत किया जाता है। इसका वर्णन भविष्योत्तर पुराण में मिलता है।
इस व्रत के बारे में भगवान विष्णु ने लक्ष्मी को बताया था। धर्म ग्रंथों के अनुसार यह व्रत मुख्य रूप से महिलाओं के लिए है। इस व्रत को करने से स्त्रियां सौभाग्यवती होती हैं और उन्हें वैधव्य (विधवा) का दु:ख भी नहीं भोगना पड़ता। इस व्रत की विधि इस प्रकार है- आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर जरुरी काम निपटा लें। इसके बाद नहाकर हाथ में जल लेकर जया पार्वती व्रत का संकल्प इस प्रकार लें- मैं आनन्द के साथ स्वादहीन धान से एकभुक्त (एक समय भोजन) व्रत करूंगी। मेरे पापों का नष्ट करना व सौभाग्य का वर देना। इसके बाद अपनी शक्ति के अनुसार सोने, चांदी या मिट्टी के बैल पर बैठे शिव-पार्वती की मूर्ति की स्थापना करें। स्थापना किसी मंदिर या ब्राह्मण के घर पर वेदमंत्रों से करें या कराएं। इसके बाद पूजन करें- सर्वप्रथम कुंकुम, कस्तूरी, अष्टगंध, शतपत्र (पूजा में उपयोग आने वाले पत्ते) व फूल चढ़ाएं। इसके बाद नारियल, दाख, अनार व अन्य ऋतुफल अर्पित करें तत्पश्चात विधि-विधान से षोडशोपचार पूजन करें। माता पार्वती का स्मरण करें व उनकी स्तुति करें, जिससे वे प्रसन्न हों। अब निवेदन करें कि हे प्रथमे। हे देवि। हे शंकर की प्यारी। मुझ पर कृपा कर यह पूजन ग्रहण करें व मुझे सौभाग्य का वर दें। इस प्रकार निवेदन करने के बाद इस व्रत से संबंधित कथा योग्य ब्राह्मण से सुनें। कथा समाप्ति के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं। बाद में स्वयं नमकरहित भोजन ग्रहण करें। इस प्रकार जया पार्वती व्रत विधि-विधान से करने से माता पार्वती प्रसन्न होती हैं और हर मनोकामना पूरी करती हैं। |