22 सितम्बर 2023, भाद्रपद शुक्ल 7
राधा अष्टमी व्रत

कृष्ण जन्माष्टमी के करीब 15 दिन बाद राधा जन्माष्टमी मनाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन राधा जी का जन्म हुआ था। इस त्यौहार की खास रौनक इनके जन्म स्थान बरसाने में देखने को मिलती है। बरसाना के लाड़िली जी मंदिर सहित अन्य सभी मंदिरों को इस दिन विशेष रूप से सजाया जाता है।
राधा अष्टमी का व्रत कैसे करें -
  • प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त हो जाएं।
  • इसके बाद मंडप के नीचे मंडल बनाकर उसके मध्यभाग में मिट्टी या तांबे का कलश स्थापित करें।
  • कलश पर तांबे का पात्र रखें।
  • अब इस पात्र पर वस्त्राभूषण से सुसज्जित राधाजी की सोने (संभव हो तो) की मूर्ति स्थापित करें।
  • तत्पश्चात राधाजी का षोडशोपचार से पूजन करें।
  • ध्यान रहे कि पूजा का समय ठीक मध्याह्न का होना चाहिए।
  • पूजन पश्चात पूरा उपवास करें अथवा एक समय भोजन करें।
  • दूसरे दिन श्रद्धानुसार सुहागिन स्त्रियों तथा ब्राह्मणों को भोजन कराएं व उन्हें दक्षिणा दें।
  • राधा अष्‍टमी व्रत का महत्‍व -
    ऐसा माना जाता है कि राधा रानी के प्राकट्य दिवस पर व्रत रखने से भगवान कृष्‍ण भी प्रसन्‍न होते हैं और मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। मान्‍यता के अनुसार इस व्रत को करने से धन की कमी नहीं होती और घर में बरकत बनी रहती है। संतान और पति की लंबी आयु के लिए भी इस व्रत का विशेष महत्व है।