| संग्रहणी के घरेलु उपचार |
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संग्रहणी एक भयंकर रोग है| इसमें रोगी को पाखाना अधिक आता है| मल में चर्बी भी होती है| इस रोग के कारण रोगी हर समय दु:खी रहता है| वह सभी प्रकार के खाद्य पदार्थों को पचा नहीं पाता| कई बार तो मृत्यु तक हो जाती है| सुबह उठते ही रोगी को शौच आता है| चूंकि बड़ी मात्रा में मल निकलता है, इसलिए रोगी घबरा जाता है| इस रोग में आंतों में दूषित पदार्थ उत्पन्न हो जाते हैं जिससे रोगी को बार-बार शौच करने जाना पड़ता है| |
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1. हींग, अजवायन और सोंठ हींग, अजवायन और सोंठ बराबर मात्रा में लेकर पीस लें| इसमें से एक-एक चम्मच चूर्ण सुबह-शाम गरम पानी के साथ भोजन के बाद लें| 2. छाछ और हींग छाछ के साथ जरा-सी हींग का सेवन करें| 3. कालीमिर्च और काला नमक कालीमिर्च और काला नमक – दोनों 3-3 ग्राम मट्ठे के साथ लें| 4. पिप्पली, नीबू और सेंधा नमक 4 ग्राम पिप्पली का सेवन नीबू के रस तथा सेंधा नमक के साथ करें| 5. हरड़, काला नमक और पानी हरड़ की छाल का चूर्ण और थोड़ा-सा काला नमक पानी में अच्छी तरह घोलें| फिर इसे सुबह-शाम पिएं| 6. मौलसिरी 2 ग्राम मौलसिरी के पत्तों का चूर्ण दिन में दो बार सेवन करें| 7. अदरक, तुलसी, कालीमिर्च और लौंग अदरक, तुलसी, कालीमिर्च तथा लौंग का काढ़ा 15 दिनों तक पिएं| 8. सोंठ और मिश्री आधा चम्मच सोंठ के चूर्ण में जरा-सी मिश्री मिलाकर सेवन करें| 9. बेलगिरी, सेंधा नमक और मट्ठा बेलगिरी और सेंधा नमक मिलाकर चूर्ण बना लें| इस सुबह-शाम मट्ठे के साथ प्रयोग करें| 10. जीरा, हींग और अजवायन जीरा, हींग और अजवायन का चूर्ण सब्जियों में डालकर खाने से संग्रहणी का रोग खत्म हो जाता है| 11. सोंठ, गुरुच, नागरमोथा और अतीस सोंठ, गुरुच, नागरमोथा और अतीस-सबको समान मात्रा में लेकर मोटा-मोटा पीस लें| इसमें से दो चम्मच का जौकुट काढ़ा बनाकर 15 दिनों तक सेवन करने से संग्रहणी के रोगियों को काफी आराम मिलता है| 12. सोंठ, पीपल, नमक, अजमोद और पानी शोधित गंधक 2 ग्राम, सोंठ 10 ग्राम, पीपल 5 ग्राम, पांचों नमक 5 ग्राम तथा भुना हुआ अजमोद 5 ग्राम – इन सबको बारीक पीसकर एक शीशी में भर लें| इसमें से दो चुटकी दवा पानी के साथ सेवन करें| 13. हरड़, पीपल, सोंठ, मट्ठा और काला नमक हरड़ की छाल, पीपल, सोंठ और काला नमक-सबको 10-10 ग्राम की मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें| इसमें से आधा चम्मच चूर्ण मट्ठे के साथ सेवन करें| 15 दिनों तक चूर्ण खाने से संग्रहणी का रोग जाता रहता है| 14. अनारदाना, सोंठ, कालीमिर्च और मिश्री 10 ग्राम अनारदाना, 2 ग्राम सोंठ, 2 ग्राम कालीमिर्च और 10 ग्राम मिश्री को कूटकर चूर्ण बना लें| इसके सेवन से हर प्रकार की संग्रहणी खत्म होती है| संग्रहणी में क्या खाएं क्या नहीं नित्य सादा किन्तु सुपाच्य भोजन करें| भोजन में पपीता, अमरूद, कच्चे बेल का गूदा तथा सोंठ का चूर्ण नियमित रूप से लें| छाछ और मक्खन निकला दूध भी ले सकते हैं| मिर्च-मसालेदार, चटपटी, खट्टी, कड़वी तथा सख्त चीजें बिलकुल न खाएं| तरोई, लौकी, परवल, करेला, मेथी, पालक, गाजर आदि का सेवन अधिक मात्रा में करें| सलाद का प्रयोग नित्य करें| फलों में अमरूद, पपीता, शरीफा, केला, संतरा और नीबू का रस लें| संग्रहणी का कारण भावावेश में आकर मनुष्य अनियमित भोजन कर लेता है, अत: उसे संग्रहणी की बीमारी हो जाती है| इसमें व्यक्ति के पेट की अग्नि मन्द पड़ जाती है| पाचन शक्ति इतनी बिगड़ जाती है कि खाया गया भोजन बिना पचे ही मल के रूप में निकल जाता है| यह तीन तरह की होती है – वातज संग्रहणी – यह संग्रहणी उन लोगों को होती है जो बासी चीजें खाते हैं| उनके पेट में वायु कुपित होकर पेट की अग्नि को धीमी कर देती है जिसके कारण भोजन ठीक से पच नहीं पाता| कफज संग्रहणी यह संग्रहणी कफ बनाने वाली चीजों को खाने से होती है| भारी, चिकनी, तली हुई, शीतल वस्तुएं खाने तथा भोजन के बाद तुरंत सो जाने से भोजन अच्छी तरह नहीं पचता| फलत: आंव सहित मल आने लगता है| पित्तज संग्रहणी पित्तज संग्रहणी के शिकार वे लोग होते हैं जो लाल मिर्च, गरम वस्तुएं, तीखी, खट्टी तथा खारी चीजों का अधिक प्रयोग करते हैं| उनको नीले, पीले या कच्चे दस्त आने लगते हैं| संग्रहणी की पहचान वातज संग्रहणी में हरे रंग का मॉल आता है| इसमें पेट में दर्द, ऐंठन, भारीपन तथा जलन की शिकायत हो जाती है| कभी-कभी वायु के कारण सर दर्द होने लगता है| घबराहट बढ़ जाती है| भूख कम लगती है| कफज संग्रहणी में भोजन पूरी तरह नहीं पचता, अत: पाखाना जाने के बाद कमजोरी अधिक हो जाती है| गले में खुश्की, प्यास की अधिकता, कान, पसली, जंघा, पेड़ू, जोड़ों आदि में दर्द मालूम पड़ता है| कोई भी चीज खाने पर स्वादिष्ट नहीं लगती| बार-बार शौच को जाना पड़ता है| पित्तज संग्रहणी में नीले रंग के पतले-पतले दस्त आते हैं| खट्टी डकारें थोड़ी-थोड़ी देर बाद परेशान करती हैं| प्यास अधिक लगती है| हृदय, गले तथा पेट में जलन होती है| |