| निर्गुण्डी के फायदे और नुकसान |
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सेहत के लिए निर्गुण्डी के फायदे कई हैं, जिनके बारे में हम नीचे विस्तार से बता रहे हैं। बस ध्यान रहें कि निर्गुण्डी का उपयोग शारीरिक समस्या से बचाव के लिए किया जाना चाहिए। गंभीर बीमारी के इलाज के लिए इसपर निर्भर नहीं रहा जा सकता। इसके लिए डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक है।
सूजन को कम करने के लिए निर्गुण्डी का उपयोग सूजन की समस्या में फायदेमंद हो सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर पब्लिश एक शोध के अनुसार, इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होता है। यह प्रभाव सूजन को कम करने में मददगार हो सकता है। साथ ही यह गठिया से राहत भी दिला सकता है । गठिया का एक लक्षण जोड़ों में सूजन भी है । इसी वजह से इसे सूजन के लिए प्रभावी माना जाता है। सिरदर्द के लिए सिरदर्द की समस्या को दूर करने के लिए भी निर्गुण्डी का उपयोग सालों से किया जाता रहा है। इस विषय पर हुए शोध से पता चलता है कि निर्गुण्डी की पत्तियों में एनाल्जेसिक यानी दर्द निवारक गुण होता है। इस प्रभाव के कारण यह सिरदर्द को कम कर सकता है। मासिक धर्म में निर्गुण्डी का उपयोग मासिकधर्म चक्र को नियमित करने के लिए भी किया जा सकता है। इस विषय में चूहाें पर हुए शोध के अनुसार, निर्गुण्डी की पत्तों में ओलिगोमेनोरिया की स्थिति को ठीक करने का गुण होता है । ऑलिगोमेनोरिया का मतलब है मासिक धर्म का अनियमित होना और रक्त का प्रवाह सामान्य न होना । इसी वजह से मासिक धर्म को नियमित करने के लिए निर्गुण्डी का इस्तेमाल किया जाता है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि निर्गुण्डी में मौजूद कौन-सा तत्व इसमें मदद करता है। महिलाओं की प्रजनन क्षमता के लिए पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) के कारण महिलाओं में प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है। इस समस्या में निर्गुण्डी का उपयोग फायदेमंद हो सकता है। चूहों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, निर्गुण्डी के अर्क में मौजूद फ्लेवोनॉइड्स में एंटीएंड्रोजेनिक प्रभाव होता है। यह फर्टिलिटी स्टेटस में सुधार कर सकता है। साथ ही एंटी पीसीओएस के रूप में कार्य करता है, जिससे महिलाओं की प्रजनन क्षमता में सुधार हो सकता है। घाव भरने के लिए निर्गुण्डी घाव भरने में भी मददगार हो सकता है। इसके पौधे के लगभग सभी हिस्सों का इस्तेमाल घाव भरने के लिए किया जा सकता है । इसके अलावा, निर्गुण्डी का तेल भी पुराने घाव को ठीक कर सकता है। इसमें घाव को साफ करने और उसे भरने वाले गुण होते है। साथ ही यह एंटीबैक्टीरियल प्रभाव से भरपूर होता है, जो घाव में पनपने वाले बैक्टीरिया को खत्म कर सकता है । यौन स्वास्थ्य निर्गुण्डी का उपयोग यौन शक्ति को बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। रिसर्च से पता चलता है कि यह पुरुषों की यौन क्षमता और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन को बेहतर कर सकता है। हालांकि, शोध में इस बात का भी जिक्र है कि इसकी पत्तियों का रस यौन भावनाओं को कम कर सकता है। इसी वजह से इसका इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह पर ही करें । स्तनपान के लिए स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को दूर करने के अलावा निर्गुण्डी स्तन का दूध बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है। एक शोध में पाया गया है कि निर्गुण्डी को थोड़ी मात्रा में लेने पर यह स्तन के दूध को बढ़ा सकता है। वहीं, अगर इसका सेवन अधिक किया जाता है, तो यह दूध की मात्रा को कम कर सकता है । निर्गुण्डी का कौन-सा गुण दूध के उत्पादन में मदद करता है, यह शोध का विषय है। गाउट गाउट एक तरह का अर्थराइटिस है। इस समस्या को कम करने में भी निर्गुण्डी को फायदेमंद माना जाता है। दरअसल, गाउट इंफ्लेमेटरी बीमारी है। इससे राहत दिलाने में इसके पत्तों से बना तेल निर्गुण्डी के बीज और पत्ते का जूस सभी मदद कर सकते हैं। माना जाता है कि इनमें एंटीइंफ्लेमेटरी प्रभाव होता है, जो गाउट और अर्थराइटिस दोनों से राहत दिला सकता है छालों (ब्लिस्टर) के लिए निर्गुण्डी का उपयोग छालों को ठीक करने के लिए भी किया जाता है। एक शोध में बताया गया है कि इसके पत्ते का इस्तेमाल सालों से छालों और फफलों से राहत पाने के लिए लोग करते रहे हैं । फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि इसका कौन-सा प्रभाव इसमें लाभदायक होता है। नसों से जुड़ी समस्या के लिए निर्गुण्डी का उपयोग नसों से जुड़ी समस्या को दूर करने के लिए भी किया जा सकता है। शोध में पाया गया कि यह नसों की इंफ्लेमेशन को कम कर सकता है। साथ ही निर्गुण्डी से नस संबंधी साइटिका की समस्या में होने वाले दर्द और सूजन को भी कम किया जा सकता है । एलिफेंटायसिस (हाथी पांव) एलिफेंटायसिस की समस्या को दूर करने के लिए भी निर्गुण्डी का उपयोग पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है । दरअसल, यह एक ऐसा बैक्टीरियल संक्रमण है, जो मच्छरों के काटने से हो सकता है। इसके कारण सूजन की वजह से शरीर का कोई भी हिस्सा असामान्य रूप से बढ़ने लगता है । इस समस्या से एनाल्जेसिक और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण कुछ राहत दिला सकते हैं । यह दोनों गुण निर्गुण्डी में होते हैं, जो दर्द और सूजन को थोड़ा कम कर सकते हैं । बस ध्यान रहे कि यह एक ऐसी समस्या है, जिसमें डॉक्टरी इलाज जरूरी है। इसके लिए सिर्फ निर्गुण्डी पर निर्भर नहीं रहा जाना चाहिए। त्वचा संबंधी समस्याओं में सेहत के साथ ही निर्गुण्डी का उपयोग त्वचा के लिए भी किया जा सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, निर्गुण्डी त्वचा संबंधी बीमारियों से बचाने में मदद कर सकता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि स्किन कैंसर की वजह से दिखने वाले बढ़ती उम्र के लक्षणों में सुधार कर सकता है। इसके अलावा, यह स्किन अल्सर और एलर्जी को भी ठीक कर सकता है। बालों के लिए सेहत और त्वचा के साथ ही निर्गुण्डी का उपयोग बालों की ग्रोथ और मजबूती के लिए भी किया जा सकता है। दरअसल, निर्गुण्डी की पत्तियों का जूस हेयर टॉनिक की तरह काम कर सकता है। इसका उपयोग नारियल तेल के साथ करने पर यह गंजेपन और डेड्रफ की समस्या में भी फायदेमंद हो सकता है। इतना ही नहीं, निर्गुण्डी का पेस्ट बालों को बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है । इसमें मौजूद कौन-सा तत्व इसमें मददगार है, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। निर्गुण्डी के नुकसान – निर्गुण्डी के फायदे ही नहीं, बल्कि नुकसान भी हो सकते हैं। इसी वजह से आगे हम निर्गुण्डी के नुकसान के बारे में बता रहे हैं
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