हिन्दी पंचांग कैलेंडर
जाने क्या होती है याज बीमारी

याज एक प्रकार की संक्रामक बीमारी है और यह त्वचा के साथ हड्डियों भी प्रभावित करती है। इसे चमड़े पर पैदा होने वाली गांठ के नाम से भी जाना जाता है। यह बीमारी पश्चिमी अफ्रीका, इंडोनेशिया, न्यू गूआना, हैती, पेरू, कोलंबिया, इक्वाडोर और ब्राजील के कुछ हिस्सों में होने वाली सामान्य बीमारी है। यह बीमारी बच्चों को अधिक होती है। इस बीमारी के होने पर त्वचा पर चकत्ते, छाले, छोटी गांठ या घाव हो जाता है। यह संक्रमण एक-दूसरे को छूने से भी हो सकता है। यह बीमारी कैसे होती है और कौन इससे सबसे अधिक प्रभावित होता है।

क्या है याज बीमारी
यह एक प्रकार की संक्रामक बीमारी है, जिसकी चपेट में त्वचा के साथ हड्डियां भी आती हैं। याज एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक फैलता है। इसकी चपेट में 2 से 5 साल के बच्चे अधिक आते हैं। जो बचचे कम कपड़े पहनते हैं उनको यह अधिक तेजी से अपनी चपेट में लेता है। कमजोर इम्यूनिटी के कारण भी यह बीमारी बच्चों को अधिक होती है। इसके अलावा जिनको अधिक चोट लगती है यह उनमें भी तेजी से फैलता है।
कब इसकी जानकारी हुई
1950 के दशक में यह बीमारी बहुत तेजी से फैलने वाली बीमारी थी और इसकी चपेट में 50 से 100 मिलियन से अधिक लोग थे। इसी दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 46 देशों में इसका परीक्षण करने के बाद 50 मिलियन लोगों का उपचार कराया। हालांकि भारत में इसके कम मामले ही देखने को मिलते हैं। डब्यूएचओ के आंकड़ों की मानें तो भारत में हर साल मात्र 5 हजार लोग इसकी चपेट में आते हैं।
याज बीमारी के कारण
याज बीमारी ट्रीपोनेमा पैलिडम नामक जीवाणु के उपजाति के कारण होती है, जो कि सिफलिस का कारण होता है (यह एक प्रकार का यौन संक्रमित संक्रमण भी है)। हालांकि याज यौन संक्रमित बीमारी नहीं है, क्योंकि सिफलिस की तरह यह लंबे समय तक और कार्डियोवस्कुीलर बीमारी का कारण नहीं बनता है। यह सीधे त्वचा को संक्रमित करने वाला संक्रमण है। यह सीधे संक्रमित त्वचा के संपर्क में आने से भी होता है। इसके तीन चरण होते हैं।
याज बीमारी का निदान
त्वाचा पर लक्षणों को देखने के बाद चिकित्सक उसका परीक्षण करता है। अगर आपने उन जगहों पर यात्रा की है जहां इस बीमारी के होने की संभावना अधिक रहती है। चिकित्सक त्वचा के ऊतकों का परीक्षण कर सकता है। प्रयोगशाला में टी. पैलिडम बैक्टीरिया की भी जांच की जाती है।
बचाव और उपचार
समय पर इसका निदान हो जाये तो इसका उपचार आसानी से हो सकता है। अगर इसका उपचार 6 महीने तक न किया जाये तो यह और भी बदतर हो सकता है। जिसको यह बीमारी है उसके पास बिलकुल भी न जायें। इसके संक्रमण से बचने के लिए एंटीबॉयटिक दवाओं का सेवन करें। इसके निदान के बाद चिकित्सक से संपर्क करें और उपचार करायें। चिकित्सक की देखरेख में इसका उपचार आसानी से हो सकता है।