| सारस्वतारिष्ट के फायदे |
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सारस्वतारिष्ट (Saraswatarishta) आयु, वीर्य, धृति, मेघा (बुद्धि), बल और कांतिको बढ़ाता है तथा वाणीको शुद्ध करता है। यह उत्तम ह्रद्य (ह्रदय को बल देने वाला) रसायन है। बालक, युवा और वृद्ध, पुरुष और स्त्री सबके लिये हितकारक है।
सारस्वतारिष्ट (Saraswatarishta) स्वर की कर्कशता और अस्पष्टता का निवारण करके स्वर को कोयल के समान मधुर बनाता है। स्त्रियो के रजोदोष और पुरुषो के शुक्रदोष को नष्ट करता है। अति अद्ययन, अति गाना आदि कारणो से स्मरण शक्ति ठीक करता है। एवं चित्तको प्रसन्न और संतोषी बनाता है। यह अरिष्ट एक मास में ह्रदय रोग का नाश करता है और एक वर्ष के सेवन से शारीरिक सिद्धि देता है। सारस्वतारिष्ट उत्तम बल्य, ह्रद्य, रसायन, वातवाहिनिया और वातकेंद्र पर शामक, चित्तप्रसादक, बुद्धिप्रद और स्मृतिवर्धक है। तोतलापन, बुद्धिमांद्य, श्रवणशक्ति और स्मरणशक्ति में न्यूनता, विचार रहित बोलना आदि विकारो पर यह अच्छा उपयोगी है, एवं उन्माद, अपस्मार, उत्साहका अभाव, उतावलापन आदि व्याधियोंमे सारस्वतारिष्ट लाभदायक है। स्त्रियो के मासिकधर्म बंद होनेपर होने वाले अनेक विकार- घबराहट, चक्कर, हाथ-पैर में शून्यता आ जाना, बेचैनी, कही भी चित्त न लगना, निद्रानाश आदि होते है। उनपर यह सारस्वतारिष्ट उत्तम कार्य करता है। इन विकारो में कितनीही स्त्रियो को चक्कर बहुत आते है, वह इतने तक की ऊंची द्रष्टि भी नहीं कर शक्ति। सोते-सोते मोटर गाडी चलने के माफिक मशतिष्क फिरता है, सर्वदा कान में नाद (आवाज) गूँजता रहता है। एसे समय पर सारस्वतारिष्ट सुवर्णमाक्षिक भस्मके साथ देने से उत्तम कार्य करता है। स्त्रियो के बीजाशय या पुरुषो के अंडकोष की वृद्धि योग्य रूप से न होने से स्त्री-पुरुषो के शरीर आयुवृद्धि होनेपर भी उच्चित अंशमे नहीं बढ़ते। युवावस्थाकी भावना भी नहीं होती। एसी स्थितिमे मकरध्वज और वंग भस्मके साथ सारस्वतारिष्ट देना चाहिये। |