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गूलर के फायदे एवं नुकसान

माउथ अल्सर और ओरल इंफेक्शन के इलाज के लिए इसकी छाल को पानी में उबालकर पीने की सलाह दी जाती है।


डायबिटीज के इलाज में लाभदायक
डायबिटीज पेशेंट्स के लिए गूलर का सेवन वरदान समान माना जाता है।

आरबीसी का प्रोडक्शन करता है
रेड बल्ड सेल्स और एंटीबॉडीज के उत्पादन के लिए विटामिन-बी 2 की जरूरत होती है। ये शरीर के कई अंगों में ऑक्सीजेनेशन और सर्कुलेशन में मदद करता है।

कैंसर में फायदेमंद
गूलर में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-कैंसर प्रॉपर्टीज होती हैं। इसके जूस को दवा के तौर पर लिया जाता है। इसमें ऐसी प्रॉपर्टीज होती हैं जो कैंसर सेल्स को नष्ट करते हैं।

अनियमित दिल की धड़कन को नियंत्रित करना
गूलर में मौजूद मैग्नीशियम अनियमित दिल की धड़कन को नियंत्रित करता है। अनियमित दिल की धड़कन के कारण मस्कुलर टेंशन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस की दिक्कत हो सकती है। इसके फल का सेवन करने से इन लक्षण को दूर किया जा सकता है।

इम्यूनिटी को बढ़ाता है
इसमें उच्च मात्रा में कॉपर होता है, जो एनीमिया की परेशानी से बचाता है। यह हमारे शरीर में एंजाइम प्रक्रियाओं के लिए बेहद जरूरी है जो एंडोथेलियल विकास या टिशू हीलिंग प्रोसेस में मदद करता है। हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कॉपर आवश्यक है।

यूरिनरी डिसऑर्डर के इलाज में मददगार
गूलर का इस्तेमाल यूरिन संबंधित परेशानियों को दूर करता है। इसमें इसके पाउडर को दिन में दो बार लेने की सलाह दी जाती है।

हीव्स
गूलर की पत्तियों और एक्सट्रेक्ट जूस को हीव्स के इलाज के लिए दिया जाता है।

चिकनपॉक्स में आराम
चिकनपॉक्स के इलाज के लिए गूलर की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है। यह चिकनपॉक्स में होने वाले बॉयल में मवाद के विकास को रोकता है और इलाज भी करता है।

टीबी में राहत
टीबी के इलाज के लिए गुलर को शहद के साथ लेने की सलाह दी जाती है।

मेनोरेजिअ के इलाज में मदद करता है
पीरियड्स में बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होने को मेनोरेजिअ कहते हैं। यह हॉर्मोनल असंतुलन या अंडाशय में अल्सर या गर्भाशय में फाइब्रॉएड के कारण हो सकता है। इसमें गूलर फिग के सूखे अंजीर को चीनी और शहद के साथ लेने की सलाह दी जाती है।

स्किन के जलने के निशान
स्किन के जलने के निशान डरावने लगते हैं। गुलर के फल का पेस्ट शहद में मिलाकर स्किन के जलने के निशान पर लगाया जाता है। इसका इस्तेमाल कर धीरे धीरे ये निशान गायब हो जाते हैं।

बवासीर और फिस्टुला के इलाज में लाभदायक
बवासीर और फिस्टुला का इलाज भी गूलर से किया जाता है। इसकी पत्तियों को तोड़ने के बाद निकलने वाले लेटेक्स को प्रभावित जगह पर लगाया जाता है।

सूजन को दूर करता है
गूलर ट्री में एंटी-इन्फलामेटरी प्रॉपर्टीज होती हैं जो सूजन को दूर करने में मदद करते हैं। इसके लिए गूलर को पत्थर से पीसकर पेस्ट बनाने और उसे प्रभावित जगह पर लगाने की सलाह दी जाती है।

पिंपल्स और झाइयों को दूर करता है
चेहरे पर पिंपल्स या झाइयां किसी को पसंद नहीं होती हैं। गूलर की छाल इसके बचाव में मदद करती है। गूलर की छाल के अंदरूनी हिस्से का पेस्ट तैयार कर प्रभावित जगह पर लगाने से राहत मिलती है। इसका उपयोग फोड़े के इलाज के लिए भी किया जा सकता है।
  • डिसेंटरी
  • पेट में दर्द
  • ब्लीडिंग डिसऑर्डर
  • नकसीर
  • अत्यधिक प्यास लगना
  • मसल्स पेन
  • यूरिनरी डिसऑर्डर
  • बुखार

गूलर का सेवन करने से निम्नलिखित साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं:
  • चक्कर आना
  • ब्लड प्रेशर कम होना
  • टायकिकार्डिया
  • ऑर्थोस्टेटिक समस्याएं
  • कफ
  • कोल्ड
  • एलर्जीक रिएक्शन