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टी ट्री ऑयल के फायदे और नुकसान

मूत्राशय संक्रमण (ब्लैडर इंफेक्शन/यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन) मूत्राशय में बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होता है। यह मूत्रमार्ग के विभिन्न अंग जैसे ब्लैडर (मूत्राशय), यूरेटर (मूत्रवाहिनी) व किडनी को प्रभावित कर सकता है । इस संक्रमण से आराम पाने के लिए टी ट्री ऑयल का उपयोग किया जा सकता है। इस तेल में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं, जो मूत्राशय के संक्रमण को रोकने में सक्षम हैं ।


आंख में फुंसी
आंखों में फुंसी एक तरह का दर्दनाक संक्रमण होता है, जो पलकों को प्रभावित करता है। यह बैक्टीरिया के कारण हो सकता है (4)। ऐसे में ब्लेफेराइटिस (blepharitis) भी कहे जाने वाली इस समस्या से आराम पाने के लिए टी ट्री एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तेल में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो बैक्टीरिया को खत्म करके फुंसी से आराम पाने में मदद कर सकते हैं (5)। इसके अलावा, टी ट्री ऑयल का उपयोग कलेजियन (अतिरिक्त सीबम के कारण आंख में होने वाली फुंसी) को भी रोकने में मदद कर सकता है (6)। इसका इस्तेमाल कभी भी आंखों के अंदर न करें। आंखों के बाहरी हिस्से पर ही इसे लगाएं।

ओरल हेल्थ
मुंह को स्वस्थ बनाए रखने में भी टी ट्री ऑयल के फायदे देखे जा सकते हैं। माना जाता है कि एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच ब्रांडी और तीन चम्मच टी ट्री ऑयल मिलाकर उससे कुल्ला करने से मुंह से जुड़ी कई समस्याओं से आराम मिल सकता है। यह घोल मुंह के अल्सर, मसूड़ों के दर्द व बदबूदार सांस से निजात पाने में मदद कर सकता है (7)। टी ट्री ऑयल को लेकिन ध्यान रखें कि कुल्ला करते वक्त यह आपके मुंह के अंदर न जाए।

नाभि का संक्रमण
पढ़ने में अटपटा लगे, लेकिन यह सही है कि नाभि की साफ-सफाई ठीक तरह से न करने पर उसमें संक्रमण हो सकता है। इससे नाभि में खुजली, दर्द और रक्तस्राव हो सकता है। ऐसे में गंदगी और कीटाणु के कारण नाभि में घाव हो जाता है। इस तरह के संक्रमण से आराम पाने में एंटीबायोटिक ट्रीटमेंट लाभदायक हो सकता है (8)। इस वजह से नाभि के संक्रमण से आराम पाने के लिए टी ट्री ऑयल के फायदे उठाए जा सकते हैं। यह तेल एंटीबायोटिक, एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल गुणों से समृद्ध होता है, जो बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक रोगाणुओं को खत्म करके संक्रमण से आराम दिलाने में मदद कर सकता है (9)। इस विषय में टी ट्री ऑयल के फायदों पर अभी और शोध की आवश्यकता। इसलिए, टी ट्री ऑयल का इस्तेमाल डॉक्टर से चर्चा करने के बाद ही करें।

पैरो के फफोलों
पैर के किसी भाग पर अधिक रगड़/दबाव पड़ने या अधिक टाइट जूते पहनने के कारण फफोले हो सकते हैं (10)। ऐसे में, फफोलों पर टी ट्री ऑयल का उपयोग करने से उनसे आराम मिल सकता है। एथलीट फुट के उपचार में भी टी ट्री ऑयल बेहद उपयोगी माना जाता है। टी ट्री ऑयल को “मैजिक हीलिंग ऑयल” कहा जाता है, जो घाव को जल्दी भरने में मदद कर सकता है। माना जाता है कि टी ट्री ऑयल और रोजमेरी ऑयल के मिश्रण में वूंड हीलिंग गुण होते हैं, जो घाव को भरने में सहायक हो सकते हैं। साथ ही यह मिश्रण अपने एंटीइंफ्लेमेटरी गुणों के कारण फफोलों के कारण हुई सूजन से भी आराम पाने में मदद कर सकता है (11)।

ड्राई सॉकेट
ड्राई सॉकेट दांतों से संबंधित एक समस्या है, जिसमें दांत निकलवाने के बाद दो-चार दिनों तक दर्द बना रहता है। जब भी दांत निकाला जाता है, तब सॉकेट में खून का थक्का जम जाता है। सॉकेट शब्द जबड़े में उस छेद से संबंधित है, जहां दांत होता है। यह रक्त का थक्का हड्डी और तंत्रिका की रक्षा करता है, लेकिन जब रक्त का थक्का अच्छी तरह से नहीं बनता, तो हड्डी और तंत्रिका खुल जाते हैं और परिणामस्वरूप दर्द होता है (12)। इससे आराम पाने में टी ट्री एसेंशियल ऑयल के एंटीमाइक्रोबियल गुण काम करते हैं। ये घाव के बैक्टीरिया को नियंत्रित करते हैं जिसके कारण यह कहा जा सकता है कि ये घाव को जल्दी ठीक होने में मदद कर सकते हैं (13)। इसके लिए कॉटन बॉल पर शहद और एक-दो बूंद टी ट्री ऑयल लगा कर घाव पर लगाएं।

साइनस संक्रमण
साइनस खोपड़ी के वो खोखले छिद्र होते हैं, जो सांस लेने में मदद करते हैं। जब किसी बैक्टीरिया, वायरस या फंगस के कारण इनमें संक्रमण हो जाता है तो उसे साइनस संक्रमण (साइनसाइटिस) कहते हैं (14)। इसके लिए टी ट्री ऑयल का उपयोग किया जा सकता है। दरअसल, टी ट्री ऑयल में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल व एंटीवायरल गुण मौजूद होते हैं, जो साइनस में होने वाले इंफेक्शन और सूजन को खत्म करके साइनस से आराम दिलाने में मदद कर सकते हैं (9)। माना जाता है कि युकलिप्टुस ऑयल के साथ टी ट्री एसेंशियल ऑयल को लगाने से श्वास से जुड़ी समस्यों से आराम पाने में लाभदायक हो सकता है (15)।

शरीर की दुर्गंध
शरीर की दुर्गंध एक जटिल समस्या है, जिससे पूरा व्यक्तित्व प्रभावित हो सकता है। जिन लोगों के शरीर से अधिक पसीना निकलता है, उनके साथ यह परेशानी ज्यादा होती है। पसीने के साथ शरीर पर बैक्टीरिया भी पनपते हैं, जो आमतौर पर शरीर की दुर्गंध का कारण बनाते हैं (16)। इससे निजात पाने लिए टी ट्री ऑयल के फायदे उठाए जा सकते हैं। यह एक गुणकारी तेल है, जो अपने एंटीबैक्टीरियल गुण से शरीर के जीवाणुओं से लड़ने का काम कर सकता है (9)।

रिंगवर्म
रिंगवर्म एक तरह का संक्रमण है, जो त्वचा पर फंगस के आक्रमण से हो सकता है। इसमें संक्रमित जगह पर लाल, खुजलीदार रिंग बन जाती है (17)। इस समस्या का एक प्रकार टिनिया पेडिस (Tinea Pedis) भी है, जिसके लिए टी ट्री ऑयल का उपयोग किया जा सकता है। टी ट्री ऑयल में एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं जो फंगल इन्फेक्शन का कारण बनने वाले फंगस को खत्म करके संक्रमण से आराम दिलाने में मदद कर सकते हैं (9)। इसके अलावा, इस एसेंशियल ऑयल में एंटीमायकोटिक गुण भी पाए जाते हैं, जो फंगस को खत्म करके संक्रमण को खत्म करने में सहायक हो सकते हैं (18)।

निमोनिया
निमोनिया फेफड़े से जुड़ा एक संक्रमण है, जिसमें वायु कोष के अंदर द्रव्य भर जाता है। द्रव्य भरने से सूजन होती है और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। निमोनिया से ग्रसित व्यक्ति को बुखार, ठंड लगना और खांसते वक्त बलगम निकलने जैसी समस्या हो सकती है (19)। इससे निजात पाने में टी ट्री ऑइल बेनिफिट्स देखे गए हैं। टी ट्री ऑयल एक प्रभावी एसेंशियल ऑयल है, जो एंटीमाइक्रोबियल गुण से समृद्ध होता है। अध्ययन में इस बात का पता चला है कि टी ट्री ऑयल को सूंघने से निमोनिया के लक्षणों को कुछ कम किया जा सकता है (20)।

मस्सा
मस्सा त्वचा का एक संक्रमण है, जो ह्यूमन पेपिलोमा वायरस यानी एचपीवी के कारण होता है (21)। मस्सा हटाने के उपाय में रूप में टी ट्री एसेंशियल ऑयल का उपयोग किया जा सकता है। एनसीबीआई द्वारा प्रकाशित एक शोध में पाया गया है कि टी ट्री ऑयल के एंटीमाइक्रोबियल गुणों के कारण इसका उपयोग मस्से से छुटकारा पाने के लिए किया जा सकता है (22)।

नाखून में फंगल इंफेक्शन
नाखून में संक्रमण एक तरह का फंगल इन्फेक्शन होता है, जो पैरों व हाथों की उंगलियों में हो सकता है। इस समस्या में नाखून का रंग पीला पड़ जाता है, नाखून मोटे हो जाते हैं और आसानी से टूटने लगते हैं (23)। इस फंगल संक्रमण से आराम पाने के लिए टी ट्री ऑयल के फायदे उठाए जा सकते हैं। इसमें मौजूद एंटीफंगल गुण संक्रमण फैलाने वाले फंगस को खत्म कर सकता है और नाखून को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है (24)। इस विषय में मनुष्यों पर अभी और शोध की आवश्यकता है और इसके लिए टी ट्री ऑयल का उपयोग करने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य कर लें।

मुंहासे
मुंहासे ऐसी समस्या है, जो किसी को भी हो सकते हैं और इनके होने की कोई एक वजह नहीं होती। ऐसे में टी ट्री ऑयल का उपयोग सेहत के साथ त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने के लिए भी किया जा सकता है। इस एसेंशियल ऑयल में एंटीसेप्टिक और एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, जो मुंहासों से निजात पाने में मदद कर सकते हैं (25) (26)। इसके लिए एक कॉटन बॉल पर थोड़ा-सा एसेंशियल ऑयल लगा कर प्रभावित जगह पर लगाने से आराम मिल सकता है। इस तरह उपयोग करने से स्किन के लिए टी ट्री ऑयल फायदेमंद हो सकता है।

रूसी और खुजली
टी ट्री ऑयल बालों के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। बालों से जुड़ी समस्याएं जैसे रूसी और खुजली से निजात पाने के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकता है। एनसीबीआई द्वारा प्रकाशित रिसर्च में इसके एंटीफंगल गुणों पर प्रकाश डाला गया है। इस रिसर्च में बताया गया है कि टी ट्री ऑयल के एंटीफंगल गुण रूसी का कारण बनने वाले फंगस को खत्म करके रूसी से निजात दिलाने में