हिन्दी पंचांग कैलेंडर
हुरहुर के हैं बहुत चमत्कारिक लाभ

  • शिरशूल-हुरहुर पत्र को पीसकर मस्तक पर लगाने से शिरशूल का शमन होता है।
  • कर्णस्राव-हुरहुर पत्र-स्वरस में मधु, तिल तैल तथा सैंधव लवण मिलाकर 1-2 बूंद कान में डालने से कर्णशूल, कर्णशोथ तथा मध्य कर्णगत विकारों में लाभ होता है।



  • कर्ण विकार-हुरहुर–पत्र–स्वरस में तुलसी पत्र स्वरस मिलाकर 1-2 बूंद कान में डालने से कर्णविकारों में लाभ होता है।
  • अतिसार-15-20 मिली हुरहुर क्वाथ का सेवन करने से आंत्रविकार तथा अतिसार में लाभ होता है।
  • पौधे का क्वाथ बनाकर 15-30 मिली मात्रा में सेवन करने से उदरशूल, अजीर्ण, अग्निमांद्य तथा गुल्म में लाभ होता है।
  • अर्श-1-2 ग्राम बीज चूर्ण का सेवन करने से अर्श में लाभ होता है।
  • बीज का क्वाथ बनाकर 10-30 मिली मात्रा में पीने से यकृत्प्लीहागत विकारों में लाभ होता है।
  • संधिशूल-हुरहुर बीज को पीसकर संधियों पर लेप करने से संधिशूल का शमन होता है।
  • व्रण-हुरहुर पत्र को पीसकर लगाने से व्रण तथा क्षत का रोपण होता है।
  • त्वक् विकार-पत्र को पीसकर लेप करने से शोथ, व्रण, कण्डू, कुष्ठ तथा अन्य त्वक्-विकारों का शमन होता है।
  • शोथ-पत्र शाक का सेवन करना शोथ में पथ्य है।
  • ज्वर-5 मिमी हुरहुर पत्र स्वरस में जल मिलाकर मात्रानुसार सेवन करने से ज्वर में लाभ होता है।