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गुणों से भरपूर है छोटी अरणी

अरणी देखने में छोटा होता है लेकिन आयुर्वेद में इसके पौष्टिकता और औषधीय गुणों के कारण उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है। चलिये इसके बारे में आगे जानते हैं-


कान दर्द से राहत दिलाने में उपयोगी अरणी
अगर कान में दर्द से परेशान रहते हैं तो बेल, एरण्ड, तर्कारी (अरणी लघु), बांस के बीज आदि द्रव्यों को समान मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। चूर्ण को 20 ग्राम की मात्रा में लेकर, 300 मिली आरनाल (काञ्जी) में पकाकर नाड़ीस्वेद करने से वातकफ के कारण होने वाले कान दर्द से राहत मिलती है। -अरणी, नीम तथा धतूरे के पत्तों का रस निकालकर बराबर मात्रा में तिल या सरसों के तेल में पकाकर तेल तैयार होने पर छानकर रखें। इसे 2-4 बूंद कान में डालने से कर्ण पीड़ा, कर्णपूय व कर्णशूल में अत्यन्त लाभ होता है। पूर्ण लाभ होने तक नियमित इसका प्रयोग करें। केवल अरणी के पत्तों को पीसकर रस निकाल लें। इस रस को गुनगुना करके 2-4 बूंद कानों में डालने से भी कान दर्द आदि समस्याओं से राहत मिलती है।

प्रतिश्याय के इलाज में फायदेमंद अरणी
चोरपुष्पी (चोरक), छोटी अरणी की छाल, बालवच, जीरा तथा कलौंजी को कूटकर, चूर्ण बनाकर छानकर रख लें। पोटली में बांधकर सूंघने से प्रतिश्याय को दूर करने में मदद करता है।

सांस की बीमारी में फायदेमंद अरणी
छोटी अरणी के पत्ते को पीसकर रस निकालकर 5-10 मिली मात्रा में सुबह-शाम पीने से सांस संबंधी कष्ट, लीवर में सूजन, पाण्डु या पीलिया रोग, प्रमेह या डायबिटीज तथा फिरङ्ग रोग (सिफिलिस रोग) में लाभ होता है।

पेट दर्द से राहत दिलाने में मददगार अरणी
छोटी अरणी के 5-10 मिली पत्ते के रस अथवा 10 मिली जड़ से बने काढ़े को पिलाने से अरुचि, अजीर्ण, आध्मान या पेट फूलना, आमाशय के दर्द, अतिसार या दस्त तथा पेट के कृमियों के इलाज में मदद करता है। इस काढ़े में 30-40 मिली काढ़े में थोड़ा सरसों का चूर्ण डालकर पीने से वातज गुल्म का इलाज करने में मदद मिलती है।

अर्श या बवासीर के इलाज में फायदेमंद अरणी
10 ग्राम जड़ को 200 मिली पानी में पकाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को 10-20 मिली की मात्रा में सुबह शाम पीने से अर्श, पूयमेह या सूजाक (गोनोरिया) तथा शोथ या सूजन को कम करने में मदद करता है।

उपदंश या सिफिलिस के इलाज में लाभकारी अरणी
यौन संक्रमण के कारण उपदंश या सिफिलिस होता है। अरणी के पत्तों का काढ़ा यारस बनाकर पीने से उपदंश तथा मेदोरोग में लाभ होता है।

प्रदर या ल्यूकोरिया के इलाज में फायदेमंद अरणी
छोटी अरणी के 5-10 मिली पत्ते के रस में थोड़ा पानी, शहद अथवा मिश्री मिलाकर पीने से प्रदर ल्यूकोरिया, गर्भाशयगत सूजन एवं अन्य गर्भाशयगत बीमारियों में भी लाभ होता है।

यौनीशैथिल्य या लूज वैजाइना के इलाज में फायदेमंद अरणी
त्रिफला, भांग, पठानी लोध्र तथा कच्चे अनार फल की छाल को समान मात्रा में लेकर चूर्ण कर लें। अब इस चूर्ण में तर्कारी (अग्निमन्थ), अरणी के पत्तों के रस की भावना को देकर 500 मिग्रा की गोली बना लें। इस गोली को सुबह योनि में रखने से योनि का संकोचन होकर योनिशैथिल्यता (शिथिलता) दूर होता है।

वातरक्त या गठिया से राहत दिलाने में लाभकारी अरणी
छोटी अरणी के पञ्चाङ्ग का चूर्ण (1-2 ग्राम),रस (5-10 मिली) या काढ़े (20-40 मिली) का सेवन करने से वातरक्त या गठिया में लाभ होता है।

ऊरुस्तम्भ या लकवा में फायदेमंद अरणी
लघु अरणी, सहिजन, तुलसी, सोंठ, कुटज तथा नीम के पत्ते, जड़ एवं फल को समान मात्रा में लेकर काढ़ा बना कर, काढ़े से अंगों का मसाज करने से ऊरुस्तम्भ या लकवा में लाभ होता है।

बच्चों के बीमारियों को दूर करने में फायदेमंद अरणी
कपित्थ, बेल, तर्कारी (अरणी लघु), वंशलोचन, एरण्ड तथा करञ्ज को समान मात्रा में लेकर काढ़ा बनायें। इस काढ़े से बच्चों का मसाज करने से बाल-रोगों में फायदा मिलता है।

रोमान्तिका या रूबेला के इलाज में लाभकारी अरणी
छोटी अरणी के जड़ का काढ़ा बनाकर उसको लगाने से रोमान्तिका या रूबेला के लक्षणों से राहत मिलने में आसानी होती है।

अरणी का उपयोगी भाग
आयुर्वेद के अनुसार अरणी का औषधीय गुण इसके इन भागों को प्रयोग करने पर सबसे ज्यादा मिलता है- जड़,पत्ता और फूल।