| गुणों से भरपूर है नील |
|
नील के फायदे और उपयोग नील में पौष्टिकारक गुण होता है, उतना ही औषधी के रूप में कौन-कौन से बीमारियों के लिए फायदेमंद होते है,चलिये इसके बारे में आगे जानते हैं-
असमय बालों के सफेद होने के रोकने और काला करने में फायदेमंद नील असमय बालों का सफेद होना आज एक बड़ी समस्या है। समान मात्रा में त्रिफला (आँवला, हरीतकी, बहेड़ा), नील के पत्ते, लौहभस्म तथा भृङ्गराज चूर्ण को अकेले या इसमें आम की गुठली का चूर्ण मिला कर, आरनाल या भेड़ के मूत्र से पीसकर बालों पर लेप करने से बाल सफेद नहीं होते हैं तथा बालों का झड़ना भी बंद हो जाता है। इसके अलावा कटसरैया, तुलसी, नील बीज, रक्तचन्दन, भल्लातक बीज आदि द्रव्यों को तिल तेल में पकाकर छानकर 1-2 बूंद तेल को नाक से लेने से तथा सिर पर मालिश करने से यह आँखों के लिए हितकर, आयुवर्धक तथा पलित रोग (असमय बाल सफेद होना) में लाभप्रद होता है। व्रण या घाव को ठीक करने में मददगार नील अगर घाव जल्दी ठीक होने का नाम नहीं ले रहा है तो नीली जड़ के पेस्ट का लेप करने से घाव भर जाता है। सिरदर्द से दिलाये आराम नील दिन के तनाव से अगर आपको हर दिन सिरदर्द होता है तो नीली जड़, तना तथा पत्ते को पीसकर मस्तक पर लगाने से सिरदर्द से आराम मिलता है। दांत के कीड़ा होने के परेशानी को कम करने में फायदेमंद नील बच्चों के लिए दांत में कीड़ा होने की बीमारी सबसे आम होती है। बच्चों को इस बीमारी से राहत दिलाने में नील का औषधीय गुण बहुत उपकारी होता है। नीली जड़ को चबाकर मुख में रखने से दाँत के कीड़े मर जाते हैं। फेफड़ों के सूजन को कम करने में फायदेमंद नील नीली जड़, पत्ता तथा तने के चूर्ण (1-2 ग्राम) का सेवन करने से कफ का निसरण होकर सांस फूलना तथा जीर्ण (फेफड़ों में सूजन रोग) लंग्स के नलिका में सूजन, कुक्कुर खांसी या हूपिंग कफ, हृदय रोग में लाभ होता है। गुल्म या ट्यूमर के इलाज में फायदेमंद है नील अगर ट्यूमर को लेकर कितना भी इलाज किया जा रहा हो और वह ठीक होने का नाम नहीं ले रहा हो तो नील का औषधीय गुण लाभकारी हो सकता है। नील का प्रयोग इस तरह से करने पर फायदा मिल सकता है-
हर दिन सुबह कब्ज के कष्ट से परेशान रहते हैं तो 1-2 ग्राम नीलनी फल व जड़ के चूर्ण के सेवन से मल कोमल होकर कब्ज व लीवर के सूजन को कम करने में फायदेमंद होता है। अर्श या पाइल्स के कष्ट को कम करने में फायदेमंद नील पाइल्स से परेशान हैं तो नील का इस तरह से प्रयोग करने पर आराम मिलेगा। बवासीर के मस्सों पर नीलनी पत्ते के पेस्ट को लगाने से अर्श में लाभ होता है। स्प्लीन को बढ़ने से रोकने में मददगार नील नीलनी जड़, तना एवं पत्ते से बने पेस्ट (1-2 ग्राम) एवं काढ़े (10-20 मिली) का सेवन करने से प्लीहा-विकारों से आराम मिलता है। योनि से होने वाले स्राव के इलाज में फायदेमंद नील 5-10 मिली पत्ते के काढ़े का सेवन करने से तथा पत्ते के काढ़े से योनि को धोने से योनिगत स्राव या वैजाइना के स्राव से आराम मिलता है। तंत्रिका विकार से राहत दिलाने में फायदेमंद नील पौधे के सत्त् का प्रयोग तंत्रिकागत विकारों की (नसों से संबंधित बीमारियों) चिकित्सा में किया जाता है। आमवात या गठिया के दर्द से दिलाये राहत नील नील के बीजों को पीसकर जोड़ो पर लगाने से आमवात या गठिया के दर्द से आराम मिलता है। विसर्प के कष्टों से राहत दिलाये नील सुबह 1-2 ग्राम नीली मूल चूर्ण का सेवन दूध के साथ करने से तथा अजा दूध में मूल को घिसकर लेप व सेवन करने से विसर्प व मूत्र संबंधी समस्याओं में लाभ होता है। अपस्मार या मिर्गी के इलाज में फायदेमंद नील 5 मिली नीली पत्ते के रस का सेवन करने से अपस्मार या मिर्गी के कष्ट से आराम पाने में मदद मिलती है। क्षय के इलाज में लाभकारी नील 2 ग्राम नीली जड़ के पेस्ट को दूध के साथ सेवन करने से क्षयरोग (टी.बी.) में लाभ होता है। वृश्चिक (बिच्छु) के विष के असर को कम करने में लाभकारी नील जिस जगह पर बिच्छु ने काटा हो उस स्थान पर पत्ते तथा जड़ के पेस्ट को पीसकर लेप करने से तथा 10-20 मिली काढ़े का सेवन करने से बिच्छु के विष के असर को कम करने में मदद मिलती है। नील के उपयोगी भाग आयुर्वेद के अनुसार नील का औषधीय गुण इसके इन भागों को प्रयोग करने पर सबसे ज्यादा मिलता है-
|