| कई रोगों की रामबाण दवा है कुश |
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कुश के फायदे कुश घास के अनगिनत गुणों के आधार पर इसको आयुर्वेद में कई बीमारियों के लिए औषधि के रुप में प्रयोग किया जाता रहा है। चलिये जानते हैं कि वह बीमारियां कौन-कौन से है-
कभी-कभी किसी बीमारी के लक्षण के तौर पर प्यास की अनुभूति ज्यादा होती है। कुश का इस तरह से सेवन करने पर मदद मिलती है। समान भाग में बरगद के पत्ते, बिजौरा नींबू का पत्ता, वेतस का पत्ता, कुश का जड़, काश का जड़ तथा मुलेठी से सिद्ध जल में चीनी अथवा अमृतवल्ली का रस डालकर, पकाकर, ठंडा हो जाने पर पीने से तृष्णा रोग या प्यास लगने की बीमारी से राहत मिलती है। प्रवाहिका या पेचिश रोके कुश अगर ज्यादा मसालेदार खाना, पैकेज़्ड फूड या बाहर का खाना खा लेने के कारण दस्त है कि रूकने का नाम ही नहीं ले रहा तो का घरेलू उपाय बहुत काम आयेगा। दो चम्मच कुश के जड़ के रस को दिन में तीन बार पीने से प्रवाहिका तथा छर्दि या उल्टी से आराम मिलता है। दस्त से दिलाया आराम कुश डायट में गड़बड़ी हुई कि नहीं दस्त की समस्या शुरु हो गई। कुश का औषधीय गुण दस्त को रोकने में मदद करता है। 10-20 मिली कुश के जड़ के काढ़े का सेवन करने से आमातिसार या दस्त में लाभ होता है। बवासीर के परेशानी से दिलाये आराम कुश अगर ज्यादा मसालेदार, तीखा खाने की आदत है तो पाइल्स के बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। उसमें कुश का घरेलू उपाय बहुत ही फायदेमंद साबित होता है। 2-4 ग्राम बला तथा कुश के जड़ के काढ़ा (2-4 ग्राम) को चावल के धोवन के साथ सेवन करने से अर्श या पाइल्स तथा प्रदर (लिकोरिया) रोग जन्य , रक्तस्राव या ब्लीडिंग से जल्दी आराम मिलता है। कुशा का महत्व औषधी के रूप में बहुत काम आता है। किडनी स्टोन को निकालने में करे मदद कुश आजकल के प्रदूषित खाद्द पदार्थ के कारण किडनी में स्टोन होने के खतरा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। कुश का सेवन पथरी को निकालने में सहायता करता है।
मूत्र संबंधी परेशानियों से दिलाये छुटकारा कुश मूत्र संबंधी बीमारी में बहुत तरह की समस्याएं आती हैं, जैसे- मूत्र करते वक्त दर्द या जलन होना, मूत्र रुक-रुक कर आना, मूत्र कम होना आदि। कुश इस बीमारी में बहुत ही लाभकारी साबित होता है।
मूत्राघात (रुक-रुक कर पेशाब होना) से दिलाये राहत कुश मूत्राघात में रुक-रुक कर पेशाब होता है जिसके कारण असहनीय दर्द सहना पड़ता है। समान मात्रा में नल, कुश, कास तथा इक्षु के काढ़े (10-20 मिली) को शीतल कर उसमें मिश्री मिलाकर पीने से मूत्राघात तथा मूत्रकृच्छ्र में लाभ होता है। सफेद पानी या प्रदर में फायदेमंद कुश महिलाओं को अक्सर योनि से सफेद पानी निकलने की समस्या होती है। सफेद पानी का स्राव अत्यधिक होने पर कमजोरी भी हो जाती है। इससे राहत पाने में कुश का सेवन फायदेमंद होता है। चावल के धोवन से पिसे हुए कुश के जड़ का पेस्ट (2-4 ग्राम) को तीन दिन तक पीने से प्रदर रोग से राहत (kusha grass benefits)मिलती है। रक्तप्रदर (अत्यधिक ब्लीडिंग) में लाभकारी कुश महिलाओं के अत्यधिक ब्लीडिंग होने की समस्या से कुश निजात दिलाने में मदद करता है।
स्तन के आकार को बढ़ाने में फायदेमंद कुश स्तन या ब्रेस्ट के आकार को बढ़ाने में सहायक होता है कुश। कुश का सेवन इस तरह से करने पर लाभ मिलता है। कुश, कास, गुन्द्रा, इत्कट, कत्तृण आदि स्तन्यजनन महाकषाय की दस औषधियों के जड़ का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में पिलाने से स्तन आकार बढ़ाने में मदद (kusha grass benefits)मिलती है। अल्सर का घाव ठीक करने में करे मदद कुश कभी-कभी अल्सर का घाव सूखने में बहुत देर लगता है या फिर सूखने पर पास ही दूसरा घाव निकल आता है, ऐसे में बांस के पत्ते का सेवन बहुत ही फायदेमंद होता है।
मिर्गी के उपचार में फायदेमंद कुश मिर्गी के कष्ट से आराम दिलाने में कुश का पौधा मददगार साबित होता है। कास के जड़, विदारीकन्द, इक्षु की जड़ तथा कुश के जड़ के पेस्ट से सिद्ध घी (5 ग्राम) अथवा दूध (100 मिली) को पीने से अपस्मार में लाभ होता है। मोटापा घटाने में करे मदद कुश आजकल के असंतुलित जीवनशैली के कारण वजन बढ़ने की समस्या आम हो गई है। कुश की जड़ आँवला का काढ़ा और साँवा के चावलों से निर्मित जूस का सेवन करने से शरीर का रूखापन तथा मोटापा कम होता है। रक्तपित्त से दिलाये राहत कुश अगर किसी साइड इफेक्ट के कारण रक्तपित्त यानि नाक कान से अनावश्यक खून निकलने लगता है तब कुश से बना घरेलू इलाज बहुत फायदेमंद सिद्ध होता है। तृणपंचमूल (कुश, काश, नल, दर्भ, इक्षु) का काढ़ा (10-20 मिली) अथवा रस (5-10 मिली) को दूध के साथ सेवन करने से अथवा क्षीरपाक बनाकर सेवन करने से रक्तपित्त तथा मूत्र के बीमारी से जल्दी राहत मिलती है। पथरी के इलाज में फायदेमंद कुश अगर आप गुर्दे की पथरी से परेशान है तो आपके लिए कुश का उपयोग फ़ायदेमंद हो सकती है क्योंकि कुश में मूत्रल और पथरी को तोड़ने का गुण पाया जाता है जिस कारण इसका सेवन पथरी को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। दिल को स्वस्थ रखने में कुश के फायदे कुश का सेवन दिल को स्वस्थ रखने के लिए फायदेमंद होता है क्योंकि कुश में हाइपो लिपिडेमिक की क्रियाशीलता पायी जाती है जो कि कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को नियंत्रित कर दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती है। शुगर को नियंत्रित करने में फायदेमंद कुश शुगर के रोगी में कुश का सेवन फ़ायदेमंद हो सकता है क्योंकि इसमें एंटी- डायबिटिक का गुण पाया जाता है जो कि शुगर को रक्त में नियंत्रित करने में मदद करता है। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कुश फायदेमंद कुश का सेवन शरीर की रोगों से लड़ने यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है इसलिए इसका सेवन छोटी -से-छोटी बीमारियों को नहीं होने देता है। त्वचा को स्वस्थ रखने में लाभकारी कुश कुश त्वचा संबंधी समस्याओं को भी ठीक करने में मदद करता है कुश का लेप लगाने से त्वचा की जलन शांत होती है साथ ही ये घाव को भरने में भी मदद करता है। कुश घास का उपयोगी भाग आयुर्वेद में कुशा घास के जड़ तथा पञ्चाङ्ग का प्रयोग औषधि के लिए सबसे ज्यादा किया जाता है। दूर्वा या कुश घास का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए बीमारी के लिए कुशा का पौधा के घास के सेवन और इस्तेमाल का तरीका पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए कुश घास का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें। |