| जीवन्ती के हैं अद्भुत फायदे |
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जीवन्ती में पौष्टिकारक गुण होता है, उतना ही औषधी के रूप में कौन-कौन से बीमारियों के लिए फायदेमंद होते है,चलिये इसके बारे में आगे जानते हैं-
नक्तान्ध्य या रतौंधी में लाभदायक जीवन्ती जीवन्ती का औषधीय गुण रतौंधी के इलाज में बहुत फायदेमंद होता है। जीवन्ती के 5-10 ग्राम पत्तों को घी में पकाकर रोज सेवन करने से रतौंधी में लाभ होता है। मुँह संबंधी बीमारियों यानि मुँह के घाव के इलाज में लाभकारी जीवन्ती समान मात्रा में जीवन्ती के पेस्ट तथा गाय का दूध मिलाकर जो पेस्ट बनेगा उसमें मधु तथा आठवाँ भाग राल मिला कर मुख तथा होंठ के घाव पर लेप करने से घाव जल्दी भर जाता है। पसलियों के दर्द से दिलाये राहत जीवन्ती अगर पसलियों के दर्द से परेशान हैं तो जीवन्ती के जड़ के पेस्ट में दो गुना तेल मिलाकर, लेप करने से पसलियों के दर्द से आराम मिलता है। खांसी को कम करने में फायदेमंद जीवन्ती 10-12 ग्राम जीवन्ती आदि द्रव्यों से बने चूर्ण में विषम मात्रा में मधु तथा घी मिलाकर खाने से कास (खांसी) में लाभ मिलता है। राजयक्ष्मा या टीबी के इलाज में लाभकारी जीवन्ती टीबी के लक्षणों से आराम पाने में जीवन्ती बहुत काम आता है। 5-10 ग्राम जीवन्त्यादि घी का सेवन करने से राजयक्ष्मा में लाभ होता है। अतिसार या दस्त को रोकने में फायदेमंद जीवन्ती खाने-पीने में गड़बड़ी हुई नहीं कि दस्त की समस्या हो गई। पुटपाक विधि से निकाले हुए 10 मिली जीवन्ती रस में 10-12 ग्राम मधु मिला कर पीने से अतिसार में लाभ होता है। इसके अलावा जीवन्ती-शाक को पकाकर दही, अनार तथा घी के साथ मिलाकर खाने से अतिसार में लाभ मिलता है। पित्तज-शोध के इलाज में लाभकारी जीवन्ती जीवन्ती का औषधीय गुण पित्तज शोध या सूजन को कम करने में बहुत मदद करती है। जीवन्ती को पीसकर पैत्तिक-शोथ पर लेप करने से शीघ्र लाभ होता है। योनि व्यापद के उपचार में फायदेमंद जीवन्ती जीवन्ती से सिद्ध घी को 5-10 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से योनिव्यापद (योनिविकारो) से आराम मिलने में आसानी होती है। संधिशोध या गठिया से दिलाये आराम जीवन्ती जीवन्ती की जड़ तथा ताजे पत्तों को पीसकर लगाने से जोड़ो के सूजन और दर्द से आराम जल्दी मिलता है। व्रण या घाव को जल्दी ठीक करने में सहायक जीवन्ती अगर अल्सर या घाव ठीक नहीं हो रहा है तो जीवन्ती पेस्ट की लुगदी बनाकर तीन दिन तक व्रण पर बांधने से व्रण जल्दी भरने लगता है। जीवन्ती के पत्तो को पीसकर घाव पर लेप करने से घाव जल्दी भर जाता है। त्वचा संबंधी बीमारियों के इलाज में लाभकारी जीवन्ती जीवन्ती, मंजिष्ठा, दारुहल्दी तथा कम्पिल्लक के काढ़ा एवं तूतिया (तुथ) के पेस्ट से पकाए घी तथा तेल में सर्जरस तथा मोम मिलाकर मलहम की तरह प्रयोग करने से बिवाई फटना, चर्मकुष्ठ, एककुष्ठ, किटिभ कुष्ठ तथा अलसक में जल्दी ही लाभ मिलता है। बुखार के कारण जलन के कष्ट से दिलाये राहत जीवन्ती जीवन्ती जड़ से बनाए काढ़े (10-30 मिली) में घी मिलाकर सेवन करने से बुखार के कारण होने वाली जलन कम होती है। सूजन से राहत दिलाये जीवन्ती जीवन्त्यादि द्रव्यों का यवागू बना कर, घी तथा तेल से छौंक कर, वृक्षाम्ल के रस से खट्टा कर सेवन करने से अर्श, अतिसार, वातगुल्म, सूजन तथा हृदय रोग का शमन होता है तथा भूख भी बढ़ती है। जीवन्ती का उपयोगी भाग आयुर्वेद के अनुसार जीवन्ती का औषधीय गुण इसके इन भागों को प्रयोग करने पर सबसे ज्यादा मिलता है-
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