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तेजोवती दूर करे कई बीमारियां

आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार तेजबल के औषधीय गुणों के कारण ही यह कई तरह के रोगों के इलाज में बहुत उपयोगी है. दांत से जुड़े रोगों के इलाज में तेजबल एक प्रमुख औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. आइये जानते हैं दांतों से जुड़े रोगों के अलावा और यह किन रोगों में फायदेमंद है.


कान के दर्द से आराम दिलाता है तेजबल
हिंगू, तेजबल और सोंठ के पेस्ट को सरसों के तेल में पका लें. इसे छानकर 1-2 बूंद तेल को कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है। सरसों के तेल में तेजबल या तुम्बुरु को पकाकर, 1-2 बूंद कान में डालने से कान का दर्द मिटता है।

मुंह के रोगों के इलाज में फायदेमंद है तेजबल
पिप्पली, अगुरु, दारुहल्दी, तज, यवक्षार, रसौत, पाठा, तेजबल और हरीतकी का चूर्ण बनाकर 1-2 ग्राम चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर कवल धारण करने से मुखरोगों का शमन होता है। तुम्बरु, हरीतकी, इलायची आदि के चूर्ण को दांतों एवं मसूढ़ों पर धीरे-धीरे मालिश करने से मसूढ़ों में होने वाली समस्याएं जैसे कि रक्तस्राव, खुजली तथा दर्द से राहत मिलती है।

दांतों से जुड़े रोग :
तेजबल के फल एवं बीज के चूर्ण को दांतों पर रगड़ने से और इसकी शाखाओं से दातून करने से दांतों से जुड़े रोग दूर होते हैं।= तेजबल की छाल का काढ़ा बनाकर गरारा करने से दांतों के दर्द से आराम मिलता है।

हिचकी रोकने में मदद करता है तेजबल
श्वास-5 ग्राम तेजोवत्यादि घृत का सेवन करने से हिचकी की समस्या में लाभ मिलता है. हिचकी रोकने के अलावा तेजोवत्यादि घृत का सेवन करने से वातज बवासीर, आंतों के रोग, दिल से जुड़े रोगों आदि में लाभ मिलता है।

बदहजमी में फायदा पहुंचाता है तेजबल
हरीतकी, तीनों नमक, यवक्षार, हींग, पुष्करमूल तथा तेजबल की छाल के चूर्ण का सेवन गर्म पानी के साथ करने से बदहजमी या अपच में लाभ होता है।

आंतों की सूजन कम करता है तेजबल
अगर आप आंतों में सूजन की समस्या से पीड़ित हैं तो घरेलू उपाय की मदद से भी आराम पा सकते हैं. 10-20 मिली तेजबल की छाल का काढ़ा या फाण्ट का सेवन करने से आंतों की सूजन कम होती है।

दस्त रोकने में मदद करता है तेजबल
1-2 ग्राम तेजबल की छाल के चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करने से दस्त रोकने में मदद मिलती है, यह चूर्ण पाचक अग्नि को तीव्र करने में मदद करता है. इसके अलावा पाचक अग्नि को बढ़ाने के लिए तेजबल के बीज के चूर्ण में मिश्री मिलाकर सेवन करें।

बवासीर में फायदेमंद है तेजबल
तेजबल, पाठा, कारवी, विडंग, देवदारु तथा चावल को घी में मिलाकर बवासीर के मस्सों का धूपन करने से बवासीर में लाभ होता है। गजपीपल, पंचकोल, तुम्बरु तथा धनियाँ आदि द्रव्यों को पीसकर, उससे पेया, दाल आदि आहार द्रव्य सिद्ध कर अनारदाना आदि अम्ल पदार्थ मिलाकर घृत, तैल आदि से संस्कृत कर पीने से अथवा उपरोक्त कल्क से घृत का पाक करके सेवन करने से जठराग्नि तीव्र होती है तथा अर्श में लाभ होता है।

लकवा के इलाज में तेजबल के फायदे
लकवा के मरीजों के लिए तेजबल काफी उपयोगी है. शरीर का जो हिस्सा लकवाग्रस्त हो उसमें तेजबल के पेस्ट का लेप करने से लकवा में फायदा मिलता है.

गठिया के मरीजों के लिए उपयोगी है तेजबल
तुम्बरू या तेजबल की छाल का काढ़ा बनाकर 15-30 मिली मात्रा में पीने से गठिया रोग में लाभ होता है। इसके अलावा तुम्बरू की लकड़ी को पकड़कर (लकड़ी की छड़ी बनाकर) चलने से भी गठिया में फायदा मिलता है।

त्वचा संबंधी रोगों में तेजबल के फायदे
त्वचा संबंधी रोगों को ठीक करने में भी तेजबल काफी उपयोगी है. इसके लिए किसी समस्या से जूझ रहे हैं तो तेजबल के पेस्ट का लेप करने से त्वचा रोगों में लाभ होता है।

हैजा के इलाज में लाभदायक है तेजबल
दूषित पानी पीने या संक्रमित खाना खाने की वजह से हैजा की समस्या होती है. हैजा के इलाज में आप तेजबल की छाल का उपयोग कर सकते हैं. इसके लिए तेजबल की छाल का काढ़ा बनाकर 15-20 मिली मात्रा में पिएं।

हिस्टीरिया में फायदा पहुंचाता है तेजबल
एक समान मात्रा में तेजबल, पुष्करमूल, हींग, अम्लवेतस, हरीतकी तथा तीनों नमक (विड, सौवर्चल, सैंधव) के (1-2 ग्राम) चूर्ण को जौ काढ़े के साथ सेवन करने से हिस्टीरिया में लाभ मिलता है।

पित्त दोष से जुड़े रोगों में लाभदायक है तेजबल
25-30 मिली बेल शर्बत में 1-2 ग्राम तेजबल के बीज के चूर्ण मिलाकर पीने से पित्त से जुड़े रोगों में लाभ मिलता है।

तेजबल के उपयोगी भाग
आयुर्वेद के अनुसार तेजबल के निम्न भाग सेहत के लिए उपयोगी हैं.
  • छाल
  • मूल