शरद पूर्णिमा पूजा विधि

शरद पूर्णिमा की सुबह सबसे पहले स्नान के बाद घर के मंदिर की सफाई करें और माता लक्ष्मी और श्रीहरि की पूजा करें। फिर गाय के दूध में चावल की खीर बनाकर रख लें। लक्ष्मी माता और भगवान विष्णु की पूजा करने के लिए लाल या पीला कपड़ा चौकी पर बिछाकर उनकी प्रतिमा को स्थापित करें। तांबे अथवा मिट्टी के कलश पर वस्त्र से ढंकी हुई लक्ष्मी जी की स्वर्णमयी मूर्ति की स्थापना कर सकते हैं।
शरद पूर्णिमा पूजन विधि
  • पूर्णिमा के दिन सुबह इष्ट देव का पूजन करना चाहिए।
  • इन्द्र और महालक्ष्मी जी का पूजन करके घी के दीपक जलाकर उसकी गन्ध पुष्प आदि से पूजा करनी चाहिए।
  • ब्राह्मणों को खीर का भोजन कराना चाहिए और उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करनी चाहिए।
  • लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस व्रत को विशेष रुप से किया जाता है। इस दिन जागरण करने वालों की धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।
  • रात को चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करना चाहिए।
  • मंदिर में खीर आदि दान करने का विधि-विधान है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चांद की चांदनी से अमृत बरसता है।
  • शरद पूर्णिमा के मौके पर श्रद्धालु गंगा व अन्य पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाएंगे। स्नान-ध्यान के बाद गंगा घाटों पर ही दान-पुण्य किया जाएगा।

पूजा में करें इसको शामिल
प्रतिमा के सामने देसी घी का दीपक और धूप जलाएं। इसके बाद गंगाजल से छीटें मारकर अक्षत और रोली से तिलक लगाएं। तिलक करने के बाद सफेद या पीली मिठाई का भोग लगाएं। लाल या पीले पुष्प अर्पित करें। इसके बाद शाम के समय चंद्रमा निकलने पर मिट्टी के 100 दीपक या अपनी सामर्थ्य के अनुसार शुद्ध घी से जलाएं। इसके बाद खीर को कई छोटे बर्तनों में भरकर छलनी से ढककर चंद्रमा की रोशनी में रख दें।

इसका जप करना है जरूरी
पूरी रात (तड़के 3 बजे तक, इसके बाद ब्रह्म मुहूर्त शुरू हो जाता है) जागते हुए विष्णु सहस्त्रनाम का जप और श्रीसूक्त का पाठ करना चाहिए। पूजा की शुरुआत में भगवान गणपति की आरती अवश्य करें। अगली सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके उस खीर को मां लक्ष्मी को अर्पित करें और प्रसाद रूप में वह खीर घर-परिवार के सदस्यों में बांट दें। इस तरह माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।